का हुकम चलता [संगीत] था वह बहुत खूबसूरत दिखता था लेकिन पता नहीं क्यों उसकी मूछे नहीं बड़ी इसीलिए वह रोज नींद से जाकर शीशे के पास खड़े होकर नकली मूछे लगाता था फिर गांव में आता था उसके मूछे असली वाले मूछ है यह लोग यकीन करते थे लेकिन उसके दरबार में सिर्फ कुछ लोगों को ही पता था कि वह नकली मूछ है उनमें से राजा के लिए खाना बनाने वाला सि दया भी था सिद्ध या राजा के लिए मनपसंद खाना बनाता था चिकन बिरयानी चिकन फ्राई मटन फ्राई मछली की सब्जी ऐसे कई प्रकार के पकवान बनाता [संगीत] था लेकिन राजा को ढोकला बहुत पसंद था खास करके दो ब्रेड के बीच में ढोकला रखा जाए तो बहुत ही ज्यादा पसंद [संगीत] था वही नहीं ना परोस भी रसोई सिधाया का ही काम था राजा जब भोजन के लिए बैठते थे तो खाने के पहले मूछ बीच में ना आए यह सोचकर निकालकर बगल में रखते थे सिद्ध या के बनाए ढोकला महाराज खूब शौक से खाते थे एक दिन अचानक सिया की मृत्यु हो गई इससे राजा के सैनिक दूसरी रसोई को लेकर आए सैनिक महाराज इसका नाम है गोपाल पूरे देश में बहुत अच्छा रसोई है आप जो भी गुण बोल रहे थे वह सब इसमें है यूं कहा महाराज ऐ गोपाल तुम्हें मैं अपने रसोई के रूप में नौकरी दे रहा हूं जितना पूछो उतनी तनखा दूंगा लेकिन तुम्हें एक बात राजस की तरह ही रखनी होगी मेरे यह मूछ नकली है लेकिन हर कोई यह असली मूछ है सोचता है यह बात बाहर किसी से बोले तो तुम्हारा सर काट देंगे यूं कहा गोपाल महाराज यह बात मेरी जान भी चली जाए तो कि किसी से नहीं बोलूंगा जी कसम है यूं कहा महाराज ठीक है ठीक है मुझे ब्रेड के बीच में डालकर ढोकला जो होता है वो बहुत पसंद है वह बनाना आता है गोपाल आता है जी मैं बहुत अच्छे से बनाता हूं यूं कहा इस तरह गोपाल वो बनाकर महाराजा को दिया तो वे मूछ निकालकर उसे खाए [संगीत] इस तरह रोज स्वादिष्ट खाना बनाकर राजा को देता [संगीत] था व मूछ निकालकर उन्हें खाता था एक दिन महाराज के पास एक चित्रकार आया वो महाराज मैंने कई राजाओं के चित्र उतारे हैं आप इजाजत दे तो आपका भी चित्र बनाऊंगा यूं कहा महाराज ठीक है कहकर अनुमति दिए वो महाराज के सामने खड़े होकर उसे देखकर चित्र बना रहा [संगीत] था कुछ देर बाद चित्र पूरा [संगीत] हुआ महाराज देखे तो उनके चेहरे पर मूछ नहीं थी इससे महाराजा को गुस्सा आया तब वे मन में मेरी मूछ नहीं है यह बात इसको कैसे पता चली शायद वो गोपाल ही बता दिया होगा अब इसे मार दिया तो बेकार में लड़ाई होगी और पड़ोसी राज्य में भी मेरे मूछ के बारे में पता चल जाएगा यूं सोच कर तुम जो चित्र बनाए अच्छा है यह लो बहुमानम वापस मत आना यह मेरा आदेश है यूं कहा वह चले गया महाराज फिर गुस्से में सैनिक से गोपाल को पकड़ कर लाने की आज्ञा [संगीत] दिए सैनिक जाकर गोपाल को पकड़ कर क्यों रे द्रोही राजा की मूछ की बात कितने लोगों को बोले रे चलो राजा के पास कहकर लेकर आए गोपाल राजा के सामने राजा जी भगवान की कसम खाता हूं मैंने किसी को भी आपके मुज के बारे में नहीं बताया जी मेरी पत्नी बच्चों की कसम मेरा यकीन कीजिए कहते हुए पैर पकड़े महाराज तुम नहीं तो और कौन बोलेगा रे सैनिक जाकर इसे सबक सिखाओ यूं कह ही रहे थे कि वहां पर चित्रकार फिर से वापस आया महाराज गुस्से से तुम्हें देश छोड़कर जाने के लिए कहा ना फिर वापस क्यों आए तब वो महाराज माफ कीजिए गलती हो गई आजकल मुझे याददाश्त कम होते जा रही है आपके चित्र पर मूछ डालना भूल गया एक मिनट का समय दीजिए वो बना देता हूं कहकर उस चित्र पर मूछ [संगीत] बनाकर महाराजा को नमस्कार करके चले गया तब महाराज को सच समझ आ गया और वे गोपाल निर्दोष है उसे छोड़ दीजिए थोड़ी देर और हो जाती तो उसे मारने का पाप मेरे सर पर आ जाता यह सब यह मुझ के वजह से हुआ है मुझे माफ करो गोपाल यह सब यह मूछ के वजह से क्यों भाई मूंछ नहीं रहे तो क्या होगा अब से मैं असली तरह ही जिऊंगा मुझे कोई मूछ की जरूरत नहीं है कोई कुछ भी सोचे मुझे परवाह नहीं है कहकर मूछ निकाल कर फेंक दिए वह देखकर गोपाल सैनिक सभा में सारे लोग बहुत खुश हुए
