[संगीत] देखा जमाना सारा भरम है इश्क इबादत इश्क करम है मेरा ठिकाना तेरी ही दहलीज है हो मैं हूं दीवारे छत है पिया तू रब की मुझे नेमत है पिया तू मेरे लिए तू बरकत का तावीज है जरा कभी मेरी नजर से खुद को देख भी है चांद में भी दाग पर ना तुझ में एक भी