ी तकदीरे तो क्या टूटी शमशीर तो क्या टूटी शमशीर से ही हो कर हर मैदान फतेह कर हर मैदान फतेह हर हर मैदान फते रे बंदे हर मैदान फते हर हर मैदान फते कर हर मैदान फते कर हर मैदान फते हर मैदान [संगीत] बते इन गर्दिशों के बादलों पे चढ़ के वक्त

का गिरवा पकड़ के पूछना है जीत का प