मैं ही क्यों इश्क जाहिर करूं तू भी कभी बोल दे बोल दे लेके जान ही जाएगा मेरी कातिल हर तेरा बहाना हुआ तुझसे ही शुरू तुझ पे ही खत्म मेरे प्यार का फसाना हुआ तू शम्मा है तो याद रखना मैं भी हूं परवाना ओ जालिमा ओ जालिमा जो तेरी खातिर तड़