[संगीत] कभी यूंही जब हुई बोझल सांसे घर आई बैठे बैठे जब यूं ही आंखें तभी मचल के प्यार से छलके छुए कोई मुझे पर नजर ना आए नजर ना आए कहीं दूर जब पिंजर जाए सांझ की दुल्हन बदन चुराए चुप केसे [संगीत] [संगीत] आए कहीं तो ये दिल कभी मिल नहीं पाता